Santulit Aahar in hindi essay

संतुलित आहार

संतुलित आहार

हमारे जीवन में भोजन बहुत आवश्यक है। क्योंकि भोजन से ही हमें ऊर्जा मिलती है। जो हमें कोई भी कार्य करने के लिए स़क्ष्म बनाती है। अगर हम भोजन नहीं करते हैं तो हम कमज़ोर और कोई भी काम करने के लिए सक्ष्म नहीं हों पाते हैं। भोजन से ही हम शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते है। 

स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार (Balance Diet) व व्ययाम की आवश्यकता होती है।

संतुलित आहार क्या होता है?

संतुलित आहार वह आहार होता है जिसमें सभी  प्रकार के पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते है। हमारे भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट व खनिज जैसे पदार्थ होने चाहिए। 

अधिकांश भारतीय शाकाहारी होते हैं। ऐसे में प्रोटीन प्राप्ति करने के लिए वह दालों पर निर्भर करते हैं क्योंकि दालों में 25% प्रोटीन पाया जाता हैं। इनके आहार में मांसाहारी पदार्थ बहुत कम मात्रा में होते हैं। दालों में बी- समूह के विटामिन विशेषक थायमिन व फोलिक अम्ल अधिक पाए जाते हैं, परंतु ये विटामिन दालों के छिलके में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। धुली हुई दालों में इनकी मात्रा बहुत कम हो जाती है। अंत: साबुत तथा छिलके वाली दालों का प्रयोग अधिक करना चाहिए । प्रोटीन के लिए सोयाबीन का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि इसमें 40%  प्रोटीन होता हैं। इनके प्रोटीन का जैविक मूल्य भी अधिक होता हैं। दालों में विटामिन-सी की कमी होती हैं। दालों के अंकुरण से विटामिन-सी व बी समूह के विटामिनो की मात्रा बढ़ाई जा सकती हैं। लोहा यौगिक रूप से सरल रूप में बदल कर अवशोषित होने योग्य हो जाता हैं तथा उसकी पाचन क्षमता सहज हो जाती हैं।

दूध तथा दूध से बने पदार्थों में दही, पनीर, मक्खन इत्यादि समिलित किए जाते हैं। दूध में लोहा तत्व तथा विटामिन-सी को छोड़ कर सभी पौष्टिक तत्वों की उपस्थिति होने के कारण इसे काफ़ी हद तक सम्पूर्ण आहार भी माना जाता हैं।दूध में कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम तथा विटामिन-ए प्राप्त होता हैं। क्रीमयुक्त दूध से वसा भी प्राप्त होती हैं।

दूध में बी समूह के विटामिन भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं। विशेषकर थायमीन, राइबोफ्लेविन और पायरोडोक्सिन। बी समूह के विटामिन प्रकाश में नष्ट हो जाते हैं इसलिए दूध को साफ़, ठंडा, ढककर और अंधेरी जगह में रखना चाहिए। 

पनीर, अवक्षेपित प्रोटीन है तथा इसमें वसा और लैक्टोज लगभग नहीं होता। पनीर आसानी से पच जाता हैं। पनीर निकलने के बाद बचे हुए तरल को दही का  पानी या छाछ कहते हैं। छाछ में खनिज लवणो व दूध की वसा भरपूर मात्रा में होती हैं। 

माँस- इसके अंतर्गत पशु-पक्षीयों का मांस और अंडे सम्मिलित होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनका प्रोटीन उत्तम श्रेणी का तथा अधिक जैविक मूल्य का होता हैं। अंडे से प्राप्त होने वाले प्रोटीन को ए-ग्रेड प्रोटीन माना जाता हैं। अन्य प्रोटिनयुक्त पदार्थों की तुलना अंडे के प्रोटीन से की जाती हैं। इन खाद्य पदार्थों में लोहा तत्व और बी-समूह के विटामिन  भी अधिक पाए जाते हैं। 

इस वर्ग के खाद्य पदार्थ पूर्ण प्रोटीन, वसा, विटामिन-बी, कैल्सियम के बहुत अच्छे स्रोत है व शारीरिक वृध्दि व निर्माण में सहायक होते हैं। 

व्यायाम और योगा हमारे लिए क्यों ज़रूरी हैं? 

व्यायाम- व्यायाम की हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। व्यायाम करने से हमें कमज़ोरी, आलसीपन व थकावट नहीं होती हैं। व्यायाम करने से हमें कोई भी काम करने में थकावट नहीं होती हैं। व्यायाम करने के भी कई सारे तरीक़े होते हैं। जैसे: अगर कोई मोटापा कम करना चाहता है तो वहाँ थोड़ा भोजन करके व्यायाम करें। जब कोई बीमार व्यक्ति व्यायाम करें तो वो भी थोड़ा भोजन करके व्यायाम कर सकते हैं। 

नियमित व्यायाम न केवल मधुमेह से बचाव करने में बल्कि इस बीमारी के प्रबन्धन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित व्यायाम से रक्त में शर्करा के स्तर में कमी आती है तथा इंसुलिन की उत्पत्ति में वृध्दि होती है। पैदल चलना एक प्रभावी व्यायाम है। 

अब आप ये सोच रहे होंगे कि संतुलित आहार में क्या लें? क्या न लें? 

आप आपने भोजन में ज़्यादा से ज़्यादा हरी सब्जियों का सेवन करें। जिसमें आप पालक, करेला, पत्ते दार सब्ज़ियों का सेवन करें। 

आप रोज़ सुबह उठ के पानी पीए और 20-30 मिनट तक कुछ न खाएँ और ना ही पीए। 

योगा का अर्थ- ‘योग’ शब्द संस्कृत भाषा के ‘यूज’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है- जोड़ना अथवा मिलना। योग एक संपूर्ण जीवन-शैली अथवा साधना है। जिससे व्यक्ति को अपने मन, मस्तिष्क तथा स्वयं पर नियंत्रण करने में सहायता मिलती है। मन पर नियंत्रण करके तथा शरीर को स्वस्थ रखकर व्यक्ति परम – आंनद का अनुभव कर सकता है। इस प्रकार यह माना जाता है कि, योग सभी प्रकार के दुख एवं पीड़ा को नष्ट करता है। 

मोटापे से बचाव तथा नियंत्रण में योग की भूमिका:

नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम तथा योग करने से मोटापे की समस्या पर काफ़ी हद तक क़ाबू पाया जा सकता है। मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति के लिए योगासन अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते है। 

 1.वज्रासन:- वज्र का मतलब होता है कठोर अथवा मज़बूत। इस आसन को करने से पैर, विशेषकर जांघ का हिस्सा मज़बूत होता जाता है। शरीर का निचला भाग स्थिर होने के कारण इस आसन को ‘वज्रासन’ कहा जाता है। इस आसन को दिन में कभी भी कर सकते है। यह एकमात्र ऐसा आसन है जिसको खाने के तुरंत बाद भी कर सकते हैं। 

  2. हस्तसन:– हस्तसन के अभ्यास से कमर की चर्बी कम होती है। यह गर्भाशय तथा जनानेद्रिय स्त्त्रावो के लिए भी कारगर है। क़द बढ़ाने में भी हस्तासन सहायक सिद्ध है। यह जंघाओ और पिंडलियो की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है। 

मधुमेह से बचाव तथा नियंत्रण में योग की भूमिका: 

नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम तथा योग करने से मधुमेह की समस्या पर काफ़ी हद तक क़ाबू पाया जा सकता है। मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति के लिए योगासन अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। 

  1. भुजांगासन:- यह आसन करते समय शरीर का आकर फ़न उठाए हुए सर्प के समान होने के कारण इसे ‘ भुजांगासन ‘ कहा जाता है। पीठ के दर्द से पीड़ित व्यक्तीयो के लिए यह सब से लाभकारी आसन हैं। 
  2. अर्ध-मत्स्येंद्रासन:- संस्कृत में ‘अर्ध’ का मतलब ‘आधा’ होता है। इस मुद्रा में हम अपनी रीढ़ को आधा मोड़ते है क्योंकि पूरी तरह से मोड़ पाना बहुत मुश्किल होता है। इस आसन का यह नाम योग के जन्मदाता मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर पड़ा। 

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