विज्ञान वरदान या अभिशाप / Vigyan vardan ya abhishaap

विज्ञान वरदान या अभिशाप / Vigyan vardan ya abhishaap

जब सबसे पहले मनुष्य धरती पर आया होगा एवं जब से उसने दुनिया को समझना शुरू किया होगा, उस समय उसने कदापि कल्पना नहीं की होगी कि इसी दुनिया के लोग, हमारे ही लोग, विकास की इतनी ऊँचाइयों को छुएँगे, जितना कि हम आज देख रहे हैं। यह मनुष्य की अथक कोशिशों का ही परिणाम है कि हम आज चाँद तक पहुंच गए हैं। मनुष्य की आवश्यकताएँ अनंत हैं। उसकी पूर्ति के लिए वह सदैव नए-नए आविष्कार करता रहा। नए आविष्कारों की इस नई श्रृंखला में वह आज यहाँ तक पहुँचा है। आज के युग में हर मानव विज्ञान के साधनों से प्रभावित है।

विज्ञान शब्द वि + ज्ञान से बना है। वि का अर्थ है विशेष अर्थात दुनिया का विशेष ज्ञान। विशेष ज्ञान वह है जो प्रकृति के ज्ञान के अतिरिक्त विशेष है और मानव कृत है। विश्वसनीय वही है, जिसका प्रयोगात्मक अध्ययन संभव है। वैज्ञानिक प्रगति को ही मानव विकास कहते हैं, यह विकास अकस्मात् नहीं हुआ। इसे आज के परिवेश में पहुंचने के लिए कई युगों को पार करना पड़ा। प्रारम्भ में विज्ञान का विकास बड़ी मंद गति से हो रहा था। विज्ञान ने जितनी प्रगति इस शताब्दी में की उतनी उससे पूर्व नहीं की। इस शताब्दी में विज्ञान ने हर क्षेत्र में चमत्कार उत्पन्न कर दिया है। आज जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान ने अपना प्रभाव जमा दिया है। कोई भी व्यक्ति, वस्तु व स्थान विज्ञान से अछूता नहीं है। यातायात के क्षेत्र में विज्ञान ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। आज इतने द्रुतगामी साधनों का आविष्कार हो चुका है कि हम घंटों में सारी दुनिया की सैर कर सकते हैं। थल यातायात में रेलगाड़ी एक महत्त्वपूर्ण साधन है। आज द्रुतगामी विमानों से हम सारे विश्व का भ्रमण सरलता से कर सकते हैं। यातायात के साधनों ने आज सारे विश्व को बहुत छोट बना दिया है।

पहले जड़ी-बूटियों या अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर मनुष्य का जीवन निर्भर था। चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने इतना चमत्कार पैदा किया है कि एक व्यक्ति के हृदय को चीर-फाड़ कर उसको स्वस्थ कर दिया जाता है। इंजेक्शन व ऑपरेशन ने मनुष्य को जीवन दान दिया है। प्रारम्भ में मनुष्य व पशु ही शक्ति के प्रमुख साधन थे। आज खनिज तेल, कोयला व बिजली शक्ति के प्रमुख साध न हैं, जिनसे विशाल कारखाने व रेलगाड़ियाँ चलती हैं। शक्ति के साधनों में बिजली ने चमत्कार पैदा किया है। यह जहाँ हमें प्रकाश देती है वहीं बड़े-बड़े कारखानों और उद्योगों की बड़ी-बड़ी मशीनें चलाने में काम आता है।

आज ऐसे अस्त्र-शस्त्रों का आविष्कार हो चुका है, जिनकी मनुष्य कल्पना नहीं कर सकता है। संचार के क्षेत्र में विज्ञान ने काफी प्रगति की है। रेडियो, दूरदर्शन, टेलीफोन आदि संचार के प्रमुख साधन है। मनुष्य एक गलती का पुतला है। विज्ञान के साधनों में जहाँ उसने थोडी सी असावधानी की, वहीं पर विनाश सामने है। आज शीघ्र पहुँचने के कारण बड़ी-बड़ी दुर्घटनाओं में सैंकड़ों आदमी मरते हैं। गलत दवाई व इंजेक्शन से मृत्यु निश्चित है। बिजली का करंट तो मौत का वारंट है। अस्त्र-शस्त्रों में ऐसे-ऐसे बमों का आविष्कार हो चुका है, जो कुछ ही क्षणों में समस्त विश्व का विनाश करने में सक्षम हैं। आज आतंकवादी बमों का प्रयोग कर जनसंहार में लगे हैं। आज के युगमें वैज्ञानिक साधनों ने पृथ्वी का पर्यावरण इतना दूषित कर दिया है कि विश्व को विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है।

हमें सावधानी से वैज्ञानिक साधनों का उपयोग करना चाहिए। विज्ञान मानव के हित के लिए है। इसलिए हित को ग्रहण करना चाहिए और अहित का त्याग कर देना चाहिए।

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