Holi Par Nibandh

होली पर निबंध

हमारी संस्कृति में त्योहारों का विशेष महत्व है। त्योहार हमारे जीवन में उल्लास लाते हैं तथा उत्साह का संचार करते हैं। अभी तक ये त्योहार परंपरागत ढंग से मनाए जाते रहे हैं, पर अब इन पर बाजारवाद का प्रभाव हावी होता जा रहा है। यह प्रभाव अनेक रूपों में दृष्टिगोचर होता है। यह बाजारवाद का ही प्रभाव है कि बाजार ही हमें यह बताने लगा है कि हमें किस त्यौहार को किस प्रकार मनाना चाहिए। बाजार ही त्यौहार की पूजा–विधि, खान–पान की सामग्री तथा हर्ष–उल्लास प्रकट करने का ढंग बताता है।

पहले हम अपने त्योहारों को मनाने की तैयारी कई दिनों पहले से कर देते थे। इससे त्यौहार मनाने का वातावरण बनता था। अब जिंदगी में भागम– भाग बढ़ गई है अतः सभी के पास समय का अभाव है। अतः त्योहार मनाने की तैयारी की जिम्मेदारी बाजार ने ले ली है।

वर्तमान समय में समाज पर बाजार का प्रभाव हावी होता जा रहा है। हम पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में अपने पारंपरिक तौर– तरीकों को भूलते चले जा रहे हैं। इसी कारण अब त्योहार मौज– मस्ती मनाने के अवसर बनकर रह गए हैं। अब पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव स्वरूप और बाजारवाद के चलते अनेक नए त्यौहार मनाए जाने लगे हैं जैसे– वेलेंटाइन डे, फादर्स डे, मदर्स डे, फ्रेंडशिप डे आदि। अब तो रामलीला मंच पर भी बाजारवाद हावी होता जा रहा है। इसमें भी बाजाररुपन दिखाई देने लगा है, आज हमारे त्योहारों को बाजार ने हाईजैक कर लिया है।

होली हिंदुओं का पवित्र और धार्मिक त्योहार है। यह त्यौहार हर वर्ष फागुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली को रंगो के त्यौहार के रूप में जाना जाता है। यह भारतवर्ष महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में हिंदू धर्म के अनुयायियों द्वारा उत्साह के साथ मनाई जाती है। जो लोग इस त्योहार को मनाते हैं वे रंगों के साथ खेलने और मनोरम व्यंजनों का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

होली वाले दिन लोग अपनी परेशानियों को भूल जाते हैं और भाईचारे का त्यौहार मनाने के लिए इस त्योहार का आनंद लेते हैं। होली से 1 दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होली वाले दिन लोग एक– दूसरे को रंग लगाकर  हीन भावना को समाप्त करते हैं। भक्त प्रह्लाद ने भी भगवान विष्णु को रंग लगाकर अपनी भक्ति मजबूत की थी। इस दिन समाज में चल रही कुरीतियों को समाप्त किया जाता है। 

होली एक ऐसा त्यौहार है जिसे घर के सभी लोग उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। यह त्यौहार बच्चे बड़े –बूढ़े सभी मनाते हैं। सभी लोग एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और गले मिलते हैं। सभी के घरों में तरह-तरह की मिठाईयां बनती है। इस दिन लोग किसी से किसी भी प्रकार का गिला शिकवा नहीं रखते हैं।

इस त्यौहार के पीछे एक धार्मिक कहानी है। राक्षस राजा हिरणकश्य खुद को ईश्वर मानता था। उसका राज्य में आदेश था कि घर– घर में उसकी पूजा हो, परंतु राजा का पुत्र प्रहलाद ईश्वर का भक्त था। राजा ने उसे बहुत समझाया पर प्रह्लाद ने ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी। राजा बहुत नाराज था। राजा की बहन होलिका को न जलने का वरदान प्राप्त था। लेकिन फिर भी प्रहलाद की भक्ति ने उसे जलाकर राख कर दिया। इसलिए होली से 1 दिन पहले होलिका जलाई जाती है।

होलिका जलते समय सभी लोग अपने बुराइयों को उसी आग में जलाकर राख कर देते हैं। होलिका के समय सभी लोग अपने बुराइयों को छोड़कर अच्छाई को अपनाने का वादा करते हैं।

होली के दिन अनजान लोग भी रंग लगा देते हैं तो कोई भी बुरा नहीं मानता है। बच्चे इस त्यौहार में रंग – बिरंगी गुब्बारों का खूब आनंद लेते हैं। होली के दिन बच्चे बड़े उत्साह और उमंग के साथ नए कपड़े पहनते हैं। सभी बच्चे अपने दोस्तों के साथ पहले से ही मुकाबला करते हैं कि मेरा कपड़ा तुमसे बहुत सुंदर होगा। वह सभी दोस्त एक दूसरे– से कपड़े होली की तैयारी आदि के बारे में चर्चा करते हैं।

इस दिन बच्चे खूब मस्ती करते हैं, ढेर सारी मिठाइयां खाते हैं। जब वे अपने दोस्त के घर गुलाल लगाने जाते हैं तो वहां पर उनका कुछ भी खाने का मन नहीं होता है, उनका पेट पूरा भरा हुआ होता है। फिर भी उन्हें अपने दोस्त के खातिर थोड़ा बहुत कुछ खाना पड़ता है।

त्योहारों पर सारे पकवान घर पर ही बनाने चाहिए, क्योंकि बाजार से लाए हुए पकवान नुकसानदायक होते हैं। इस दिन सभी का घर पूरा भरा हुआ लगता है। क्योंकि जिनके बेटी–दामाद, बहू होते हैं, वह त्यौहार का आनंद लेने और अपने परिवार से मिलने के लिए आते हैं। सभी एक दूसरे को रंग लगाते हैं, तथा बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। इस दिन सभी के चेहरे पर एक अलग प्रकार की रौनक होती है। 

होली के 2 दिन पहले सभी लोग अपने घरों की सफाई करते हैं। 2 दिन पहले ही लोग अपने घरों की रंगाई – पुताई करवाते हैं। सभी का घर एक नए रूप में दिखाई देता है। इस दिन सभी बड़े बूढ़े होली के उत्साह में सभी एक साथ मिलकर गाना गाते हैं।

होली आई होली आई,

सब बच्चों को खूब लुभाई।

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