नौचन्दी मेला / Nauchandi ka mela

नौचन्दी मेला

Nauchandi ka mela

समय-समय पर हमारे देश में अनेक प्रकार के मेलों का आयोजन होता रहा है। विशेष रूप से यहाँ दो प्रकार के मेलों का आयोजन होता है-धार्मिक व सामाजिक मेले। धार्मिक मेले धार्मिक स्थानों अधवा नदियों के तटों पर लगते हैं, जबकि सामाजिक मेलों का आयोजन बड़े-बड़े शहरों में होता है। नौचंदी का मेला एक सामाजिक मेला है, जो उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में प्रतिवर्ष लगता है।

नौचंदी का मेला होली के लगभग पंद्रह दिन बाद प्रारंभ होता है तथा एक महीने तक लगता है। इस मेले को देखने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं। यहाँ पूरे बाज़ार को बहुत सुंदर लाइटों से सजाया जाता है। हम भी यह मेला देखने गए। जब हम मेला दखने पहुँचे तो मौसम बड़ा सुहावना था। उस समय न तो अधिक सर्दी थी, और न ही अधिक गर्मी। मेले के मुख्य द्वार को तरह-तरह के बल्बों व झालरों से सजाया गया था। हमने मुख्य द्वार से प्रवेश किया। प्रवेश करते हो एक ओर बाज़ार में खिलौने, सॉफ्टी, चाट तथा अन्य खाने पीने की दुकानें सजी हुई थीं। दूसरी ओर कपड़ों, चीनी-मिट्टी के बर्तनों, आर्टिफीशियल ज्वैलरी व अन्य सामानों को दुकानें थीं। बीच-बीच में बच्चों के लिए झूले तथा घूमने वाले पंडाल बहुत बड़ा था तथा दूर से दिखाई दे रहा था। बाज़ार बड़े सुंदर तरीके से सजाया गया था तथा खरीदने वालों की भारी भीड़ लगी हुई थी। मेले में कई प्रकार के बिजली के झूले भी लगे हुए थे जो मेले की रौनक में चार-चाँद लगा रहे थे। झूलों के पास भी आदि लगाए गए थे। उस समय सर्कस भी लगा हुआ था। उसका लोगों की काफी भीड़ थी।

नीचदी में मुख्य बाज़ार के पास चंडी देवी का बहुत बड़ा मंदिर है। इसके नाम पर यह मेला लगता है। यहाँ भक्त लोग अपनी अद्या के अनुसार प्रसाद चढ़ाते हैं व देवी माँ के दर्शन करते हैं हमने भी वहाँ प्रसाद चढ़ाया। मेला देखने बालों की सुरक्षा का भी विशेष प्रबंध किया गया था, वहाँ उनकी सुरक्षा के लिए एक पुलिस केंद्र बनाया गया। संपूर्ण मेले में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्थाई चिकित्सालय बनाए गए थे। कुछ कंपनियों ने अपने-अपने स्टॉल लगाकर प्रदर्शनी को उपयोगी तथा आकर्षक बनाया हुआ था। वहाँ फोटो खिंचवाने को भी उचित व्यवस्था को गई थी।

नौचंदी के मेले का धार्मिक, सामाजिक व व्यापारिक महत्व है। यहाँ दूर-दूर के शहरों व गाँवों से व्यापारी अपनी-अपनी वस्तुएं बचने के लिए महसूस होती है। बच्चों तथा बड़ा सभी को यह मेला बहुत अच्छा लगता है। मेलों के दूवारा लोगों को विशेष प्रकार की ताजगी-सी महसूस होती है । यहाँ पर विभिन्न प्रकार को नई-नई वस्तुएँ देखने को मिलती हैं जिससे ज्ञान में वृद्धि होती है। मेलों के माध्यम से कंपनियों का विज्ञापन भी बड़ी सरलता से हो जाता है तथा लोगों को नए नए सामान को जानकारी भी प्राप्त हो जाती है।

1. नौचंदी का मेला कहां और क्यों लगता है?

उत्तर:-  नौचन्दी मेला मेरठ में प्रति वर्ष लगता है। यह मेला मेरठ की शान है। यहां का ऐतिहासिक नौचंदी मेला हिन्दू – मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

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