santulit aahar essay in hindi

संतुलित आहार पर निबंध

हमारे जीवन में भोजन की बहुत महत्व है, ये तो हम स​ब लोग जानते हैं । भोजन है तो हमारा जीवन है । खाना खाने से ही हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और उस ही ऊर्जा से हम अपना सारे काम करते हैं ‌। अगर हम भोजन नहीं करते हैं तो हमारा शरीर थक जाता है और हम कोई काम भी नहीं कर पाते है, दूसरे शब्दों में कहे तो हम जीवन का सारा काम भोजन की ऊर्जा से व्यापन करते हैं । भोजन से ही हमारा शारीरिक और मानसिक अवस्था स्वास्थ्य बना रहता है ।

लेकिन अगर आप सोचते हैं कि केवल हमारे शरीर के लिए खाना खाना ही काफी हैं तो आप गलत सोचते है, क्योकि आपको संतुलित आहार की जरूरत है । आप को और हम को अगर स्वस्थ रहना है तो संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए ।

संतुलित आहार वह भोजन है, जिसमें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ ऐसी मात्रा व समानुपात में हों कि जिससे कैलोरी खनिज लवण, विटामिन, प्रोटिन व अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता समुचित रूप से पूरी हो सके। इसके साथ-साथ पोषक तत्वों का कुछ अतिरिक्त मात्रा में प्रावधान हो ताकि अपर्याप्त मात्रा में भोजन मिलने की अवधि में इनकी आवश्यकता की पूर्ति हो सके। इस परिभाषा में 3 मुख्य बातें हैं-

संतुलित आहार में अलग-अलग खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।

संतुलित आहार शरीर में पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करता है।

संतुलित आहार अपर्याप्त मात्रा में भोजन मिलने की अवधि के लिये पोषक तत्व प्रदान करता है।

संतुलित आहार की जरूरत

यदि आप कोई भी कार्य करने के बाद थकान महसूस करते हैं या आपका किसी भी काम में सही से मन नहीं लगता है, तो इसका मतलब है कि आपके भोजन में पोषक तत्वों की कमी है।
संतुलित आहार वो है जो आपके शरीर को भोजन के माध्यम से जरूरी पोषक तत्व‌ प्रदान करता है।

संतुलित आहार को समाहार (सम+आहार) भी कहते हैं। जो हमारे त्रिदोष वात, पित्त और कफ तीनो को संतुलित रखता हो उसे समाहार कहते हैं।

संतुलित आहार में क्या क्या आता है?

संतुलित आहार में विटामिन, प्रोटीन, खनिज तत्व, वसा, कार्बोहाइड्रेट आता है ।

विटामिन तथा खनिज – विटामिन तथा खनिज हमारे शरीर तथा हड्डियों के रखरखाव मांसपेशियों की मजबूती प्रदान करने तथा नई सेल्स के उत्पादन में सहायता करते हैं।
सब्जी तथा फल में विटामिन खनिज का मुख्य स्रोत होती हैं।

कार्बोहाइड्रेट – कार्बोहाइड्रेट हमें हमारे दैनिक कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं ।
कार्बोहाइड्रेट हमें कितनी मात्रा में लेना है इसकी जानकारी हमें होनी चाहिए। क्योंकि‌ कार्बोहाइड्रेट हमें वजन बढ़ाने तथा घटाने में दोनों प्रकार से मदद करता है।

वसा – वसा हमारे शरीर को आवश्यक फैटी एसिड प्रदान करता है जो कि हमारे शरीर द्वारा नहीं बनाए जाते हैं। हमारे शरीर में अतिरिक्त‌ कैलोरी को एकत्रित करने के काम आता है। वसा ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है।

प्रोटीन – प्रोटीन हमारे शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण तथा दैनिक कोशिकाओं‌ को बनाए रखने के लिए मदद करते हैं।

आहार के घटक या अवयव

मनुष्य के आहार में छह अलग-अलग अवयव पाए जाते हैं:

(1) प्रोटीन, (2) कार्बोहाइड्रेट, (3) स्नेह या वसा, (4) खनिज पदार्थ, (5) विटामिन और (6) जल।

जंतुओं और मनुष्यों के शरीर भी इन्हीं पदार्थों से बने होते हैं। उनके रासायनिक विश्लेषण से ये ही अवयव उनमें उपस्थित मिलते हैं। अतएव आहार में इन अवयवों को यथोचित मात्रा में रहना चाहिए।

संतुलित आहार को प्रभावित करने वाले कारक

उम्र- उम्र से संतुलित आहार प्रभावित होता है। बच्चों को उनके शरीर के भार की तुलना में प्रौद व्यक्तियों से अधिक तत्वों की आवश्यकता होती है। संतुलित आहार में ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्व, निर्माणक तत्व व सुरक्षात्मक तत्वों की आवश्यक मात्रा सम्मिलित होती है।

बच्चों को ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्वों की अधिक आवश्यकता उनके नये ऊतकों में ऊर्जा संग्रह के लिए होती है। बाल्यावस्था तथा वृद्धावस्था में शरीर की संवेदनशीलता बढ़ जाने के कारण सुरक्षात्मक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है। वृद्धावस्था में शरीर के शियित हो जाने के कारण क्रियाशीलता कम हो जाती है । अत: ऊर्जा की कम आवश्यकता होती है।

स्वास्थ्य – व्यक्ति का स्वास्थ्य भी पोषक तत्वों की आवश्यकता को भी प्रभावित करता है। अस्वस्थता की स्थिति में क्रियाशीलता कम होने के कारण एक स्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पर यदि दोनों व्यक्तियों की क्रियाशीलता समान हो तो अस्वस्थ व्यक्ति की बी.एम.आर. अधिक होने के कारण अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अस्वस्थ व्यक्ति के शरीर में टूट-फूट अधिक होने के कारण निर्माण व सुरक्षामक तत्वों की आवश्यकता भी अधिक होती है, परन्तु पाचन क्रिया कमजोर हो जाने के कारण भोजन के रूप में अन्तर होता है।

लिंग – महिलाओं व पुरुषों के संतुलित आहार में अन्तर होता है। पुरूषों की पोषकता तथा आवश्यकता महिलाओं की अपेक्षा अधिक होती है। इसका कारण पुरूषों का आकार, भार, क्रियाशीलता का अधिक होना है। क्रियाशीलता व आकार, भार अधिक होने के कारण उन्हें ऊर्जा की आवश्यकता अनिक होती है।

जलवायु और मौसम – जलवायु और मौसम भी आहार की मात्रा को प्रभावित करते हैं। गर्म प्रदेश के देशवासियों की अपेक्षा ठण्डे प्रदेश के देशवासियों को अधिक आहार की आवश्यकता होती है। ठण्डे देश के निवासी ऊर्जा का उपयोग शरीर का ताप बढ़ाने के लिए भी करते है, इसके अतिरिका ठण्डे देश के निवासी अपेक्षाकृत अधिक क्रियाशीत होते हैं। इसी प्रकार सर्दियों के मौसम में उष्मा के रूप में ऊर्जा देने के कारण अधिक भोजन की आवश्यकता होती है।

संतुलित आहार का महत्व

हमारे शरीर को पूरी तरह स्‍वस्‍थ रहने के लिए तमाम पोषक पदार्थों की जरूरत होती है। ये पोषक पदार्थ अलग-अलग तरह के भोजन से हमें मिलते हैं, मसलन ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, सूखे मेवे, डेयरी उत्‍पाद और मीट वगैरह से। इनमें सभी की अपनी अहमियत है, इसलिए एक संतुलित आहार में ये सब चीजें होनी चाहिए ।

यदि हमारे जीवन में संतुलित आहार नहीं हुआ तो हम बार बार बीमार पड़ेगे और हम रोज दिन का काम भी अच्छे से नहीं कर पाएंगे इसलिए हमारे जीवन में संतुलन आहार का बहुत महत्व हैं ।

कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता

हमारी शारीरिक जरूरतें कई कारणों पर निर्भर करती हैं, जैसे आयु, लिंग, जलवायु, शारीरिक कार्य आदि। हमारा संतुलित आहार भी इन्हीं तथ्यों पर आधारित है।

प्रतिदिन की सामान्य दिनचर्या के लिए शिशुओं तथा वृद्ध व्यक्तियों को लगभग 1600, बड़े बच्चों को लगभग 2200 तथा जवान व्यक्तियों को लगभग 2800 किलो कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

एक औसत व्यक्ति को जीवित रहने के लिए 1700 कैलोरी और छोटी लड़की को 1450 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता हैं।

ऊर्जा

भौतिकी में, ऊर्जा चीजों का एक गुण है, जो दूसरों वस्तुओं को स्थानांतरित किया जा सकता है या अलग-अलग रूपों में रूपांतरित किया जा सकता हैं।

किसी भी कार्यकर्ता को कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊँचाई से गिरते हुए जल में ऊर्जा है क्योंकि उससे एक पहिये को घुमाया जा सकता है जिससे बिजली पैदा की जा सकती है।

ऊर्जा वस्तु नहीं है। इसको हम देख नहीं सकते, यह कोई जगह नहीं घेरती, न इसकी कोई छाया ही पड़ती है। संक्षेप में, अन्य वस्तुओं की भाँति यह द्रव्य नहीं है, यद्यापि बहुधा द्रव्य से इसका घनिष्ठ संबंध रहता है। फिर भी इसका अस्तित्व उतना ही वास्तविक है, जितना किसी अन्य वस्तु का और इस कारण कि किसी पिंड समुदाय में, जिसके ऊपर किसी बाहरी बल का प्रभाव नहीं रहता, इसकी मात्रा में कम-बेशी नहीं होती।

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