फुल बॉडी या स्प्लिट : कौन सा वर्कआउट ज्यादा बेहतर है

फुल बॉडी या स्प्लिट वर्कआउट, कौन सा अच्छा है और दोनों में क्या अंतर है। आज हम आपको फुल बॉडी और स्प्लिट ट्रेनिंग रूटीन के बारे में बताएंगे। तो दोस्तो यह दोनों ही बहुत पॉपुलर रूटीन्स हैं और लोग ज्यादा इस बात से कंफ्यूज हो जाते हैं कि इन दोनों में से कौन सा करना चाहिए।

सबसे पहले बात करते है फुल बॉडी रूटीन की

फुल बॉडी वर्कआउट

फुल बॉडी ट्रेनिंग में आप एक वर्कआउट सेशन में सभी बोडीपार्ट्स की एक्सरसाइज करते हैं। इसमे आप अप्पर और लोअर बॉडी का वर्कआउट एक ही दिन में करते हैं। फुल बॉडी वर्कआउट लगभग 2 घण्टे तक लम्बे होता है और इससे सिर्फ हफ्ते में 2-3 बार ही किया जाता है। 

इस तरह का वर्कआउट रूटीन 1970 के बॉडीबिल्डर्स इस्तेमाल करते थे जैसे आर्नोल्ड, स्टीव रीव्स और अन्य टॉप बॉडीबिल्डर्स। इस तरह के रूटीन में आप अपने हर बॉडीपार्ट को 2-3 बार ट्रैन कर सकते हो। 

और यह उन लोगो के लिए बहुत फायदेमंद है जो बहुत बिजी है और ज्यादा जिम नही जा सकते। फुल बॉडी रूटीन को सिर्फ हफ्ते में 2-3 बार करना होता है जिससे आपका काफी समय बच जाता है और इससे आपके गेन्स में कोई फर्क नही पड़ता है। ये रूटीन उन्न लोगो के लिए बहुत अच्छा होता है जिन्होंने नई-नई जिम शुरू की होती है। 

इससे आपको मजबूत और ताकतवर बनने में आसानी होती है और आपका शरीर ओवरट्रेनिंग से भी बचता है। आपके किसी भी पार्ट पर ज्यादा प्रेशर नही पड़ता जिससे आपके मसल्स अच्छे से बढ़ते हैं। आपके दिमाग पर भी ज्यादा जोर नही पड़ता और आपके आने वाले समय के लिए आपका शरीर अच्छे से तैयार हो जाता है। 

बिगिनर्स में ज्यादा एबिलिटी नही होती एक्सरसाइज करने की इसलिए उन्हें फुल बॉडी वर्कआउट ज्यादा अच्छा रहता है। उनके हर बॉडी पार्ट एक से दो एक्सरसाइज करता है और धीरे-धीरे उनका लीन मास भी बढ़ता है।

स्प्लिट ट्रेनिंग 

स्प्लिट वर्कआउट के एक सेशन में 2-3 बॉडीपार्ट्स की एक्सरसाइज की जाती है। स्प्लिट रूटीन में आप हर एक पार्ट को एक बार ही ट्रेन करते हैं। ये वर्कआउट रूटीन कुछ इस तरह किया जाता है 

सोमवार:- चेस्ट और ट्राइसेप्स
बुधवार:- बैक और बाइसेप्स
शुक्रवार:- शॉल्डर और लेग्स

इसमे एक बॉडीपार्ट को एक बार से ज्यादा ट्रेन करना मुश्किल होता है। यह रूटीन उन लोगो के लिए ज्यादा अच्छा है जिन्हें ज्यादा वर्कआउट वॉल्यूम चाहिए। मतलब जिन्हें ज्यादा एक्सरसाइज करने की जरूरत होती है जैसे:- प्रोफेशनल बोडीबिल्डर्स। 

ये ज्यादातर उन लोगो के लिए होता है जो कम्पटीशन में भाग लेते है या जो हफ्ते में 5-6 बार एक्सरसाइज करते है। कुछ लोगो को रोज़ थोड़ी थोड़ी एक्सरसाइज करने अच्छा लगता है स्प्लिट रूटीन उनके लिए बहुत अच्छा होता है। इस रूटीन एडवांस लेवल के लोगो के लिए होता है जिन्हें ज्यादा इंटेंस वर्कआउट करने होता है। और इस तरह का वर्कआउट रूटीन करने के लिए ज्यादा ताकत और स्टैमिना चाहिए होता है जो बिगिनर्स और इंटरमीडिएट लोगो में नही होता। 

मेरे विचार

दोस्तो, यह दोनों ही रूटीन मसल्स बढाते है लेकिन स्प्लिट रूटीन बहुत मुश्किल होता है और इसमें परफेक्ट रूटीन बनाना थोड़ा मुश्किल होता है। अगर आप गयम जाने के शौकीन है तो आप स्प्लिट वर्कआउट कर सकते है अथवा आप फुल बॉडी रूटीन कीजिये उससे आपकी बॉडी को मसल्स साइज बढाने में भी मदद मिलेगी और आपको ज्यादा समय जिम में नही बिताना पड़ेगा। 
मेरे हिसाब से आप अपने पहले 6 महीने फुल बॉडी रूटीन फॉलो करें और उसके बाद स्प्लिट ट्रेनिंग को करें। 

अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा तो इससे शेयर करें और अपने विचार कमेंट करके हमे बताएं।


Facebook Comments
Please follow and like us: